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उनका मोटा लण्ड चूत में उतरने लगा। ” हाय ना करो ना मौसा जी . . . सच में आप में बड़े वो हैं !”

“आय हाय रे मेरी कविता, चुदे जा रही है फिर भी ये शरमाना. . . ये ले दबा के लण्ड ले मेरा !”

“हाय रे, मेरी फ़ाड दोगे क्या, . . . मैं मर गई !” कविता की आंखें चुदाई के नशे में बंद हो रही थी। मौसा जी का भारी लण्ड उसे मस्त किये दे रहा था।

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