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” हांऽऽ आ आज तो तेरी चूत फ़ाड ही दूंगा. . . हाय कितनी प्यारी सी है ये तेरी फ़ुद्दी !”

“यह फ़ुद्दी क्या होता है जी. . . ?” कविता ने चुदते हुये फ़ुद्दी के बारे में पूछ लिया। “ओह्ह, मैं मर जाऊं. . . तेरी तो . . . मां कसम. . . चोद के रख दूंगा ! तुझे भी तेरी मां को भी !” मौसा जी उसकी अदाओं पर मर ही गये। जोश में उनकी कमर तेजी से चलने लगी।

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