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परीक्षा के लिए कोचिंग की जरूरत पड़ी तो मैं विक्रम से पढ़ने जाने लगा। दोपहरर के समय विक्रम अकेला होता था, खाली होता था तो उसने मुझे 3 बजे पढ़ने आने को कहा। मैं स्कूल से दो बजे आ जाता था तो मैं रोज 3 बजे विक्रम के पास जाने लगा। कुछ दिन तो ठीक-ठाक गुजरने गए मगर कुछ दिन बाद मुझे लगने लगा कि जैसे वो जान-बूझ कर मुझसे चिपकता है, मेरे पास आता है, मेरा लण्ड छूने की कोशिश करता है।

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