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मेरे मन का मयूर नाच उठा यानि बरसात होने वाली थी। मैं तुरन्त अपनी पेण्टी और ब्रा उतार कर नहाने को तैयार हो गई। तभी ख्याल आया कि कपड़े तो ऊपर छत पर सूख रहे हैं। मैं जल्दी से छत पर गई और कपड़े समेटने लगी। तभी मोनू ने आवाज दी,”दीदी, बरसात आने वाली है . . . ”

“हाँ, जोर की आयेगी देखना, नहायेगा क्या ?” मैंने उसे हंस कर कहा।

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