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दोनो अन्धेरे में एक दूसारे की उखडी साँसों की आवाज़ को मैहसूस कर रहे थे. राज खुश था की अब उसे कागज़ पर लिख कर अपने खयालों को तालाब की गैहरायिओं में नही फ़ैंकना पडेगा, कोयी तो है जिसके साथ वो उन खयालों को बांट सकता है. जय अपनी बडी बैहन रिया को गाडी की ड्राईवर सीट पर बैठते देख राहा था. रिया आज ब्लैक जीन्स और टौप में काफ़ी सुन्दर लग रही थी.

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