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. . . याद है ना तुम्हे?” “हाँ वो उसका फ़ैस्ला था,” राज ने अपने कन्धे उच्काते हुए काहा. “वैसे भी तुम जो करना चाहो करो मुझे क्या, मैं तो सिर्फ़ ये कैह राहा था की अगर ऐसा कुछ होता तो वो मुझसे ज़रूर कैहती. ” “यार इतना क्यों नाराज़ हो रहे हो, जब रिया ने फ़ैस्ला किया तो मैं तो नाराज़ नही हुआ था. ” जय ने काहा.

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