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एक अजीब सी लैहर रोमा के शरीर में दौड गयी. उन दोनो के सिसकने और हँसी की आवाज़ अन्धेरे में गून्ज सी रही थी. जय उन्हे देखने की कोशिश करता जा राहा था और फिर बोला, ” राज वो दोनो मन मानी कर रही हैं, और हम दोनो हैं जो बेवकूफ़ों की तरह उनका इन्तेज़ार कर रहे हैं? क्या तुम्हे अजीब सा नही लग राहा?” “हाँ लग तो राहा है, पर इसमे बुरा भी क्या है.

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