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अंकित मुझे चोरी चोरी तिरछी निगाहों से देखते रहते थे. मैं उन के करीब रहने की कोशिश करने लगी. मैं कविता के यहाँ अधिक जाने लगी. अब अंकित भी मेरे से सेक्सी मजाक करने लगा था. “हाय अंकित … कविता कहाँ है . . ”

“किचेन में है …अभी आ जायेगी बैठो . . ”

अंकित सफ़ेद पजामे और बनियान में था. मुझे देखते ही पता चल गया कि उसने अन्दर अंडरवियर नहीं पहना है.

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